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सोमवार, 27 मई 2013

उफ़्फ़ ये गर्मी----।


सूरज ने बरसायी आग
सूख गये सब ताल-तालाब
पेड़-पौधे मुरझाए सारे
सूख गये फ़ूलों के बाग।

पानी का पड़ गया अकाल
दुनिया में हो रहा बवाल
चहूं ओर सूरज का राज
कहां छिप गये मेघराज।

नदियां सारी सूख गयीं
क्यों वर्षा रानी रूठ गयीं
बच्चे बूढ़े सब हैरान
सूरज की बढ़ रही है शान।

सूरज दादा अब रुक जाओ
इतनी आग ना अब बरसाओ
इस गर्मी को अब ना बढ़ाओ
प्यासों को ना अब तड़पाओ।

मांग रही मै माफ़ी तुमसे
पूरे जग की ओर से
जगह जगह पे वृक्षारोपण
करेंगे पूरे जोर से।

00000


नित्या शेफ़ाली
कक्षा-10-सी,सेण्ट डोमिनिक सेविओ कालेज
इन्दिरानगर,लखनऊ--226016

गुरुवार, 22 अप्रैल 2010

थाने में हंगामा

शेरू कुत्ता ले कर सोटा
सीधे पहुंचा थाने में
पटक के सोटा मेज पे बोला
क्या हंगामा थाने में।

थानेदार उठा बिस्तर से
झट से पहुंचा थाने में
हाथ जोड़ के बोला फ़िर वो
सारी सर, कुछ देर हुई बस आने में।

कुर्सी पर फ़िर चढ़ कर शेरू
लगा भौंकने थाने में
कहां मर गये सभी सिपाही
रपट लिखानी थाने में।

सभी सिपाही फ़ौरन भागे
गिरते पड़ते थाने में
शेरू ने फ़िर क्लास लगाई
सरे आम बस थाने में।

थानेदार से उट्ठक बैठक
हवलदार से झाड़ू पोंछा
मेज पे बैठा मुर्गा तोड़े
अपना शेरू थाने में।

शेरू कुत्ता ले कर सोटा
सीधे पहुंचा थाने में।
000
कवियत्री--नित्या शेफ़ाली



शनिवार, 20 मार्च 2010

मेरी प्यारी गौरैया

रोज सुबह आती गौरैया

गीत नये गाती गौरैया

उठ जाओ तुम नित्या रानी

कह के मुझे जगाती गौरैया।


चीं चीं चूं चूं मीठी बोली

दाना मांग रही गौरैया

अम्मा जल्दी दे दो चावल

भूखी है प्यारी गौरैया।


पंख छपक कर पानी में तो

रोज नहाती है गौरैया

चोंच रगड़कर पेड़ की डाली

चावल चुनती ये गौरैया।


झूला झूलूं बाग में जब भी

चुपके से आती गौरैया

उड़ उड़ मेरे चारों ओर

खुशी से इतराती गौरैया।
000
कवियत्री:नित्या शेफ़ाली