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बुधवार, 16 सितंबर 2009

नन्दू की समझदारी(अन्तिम भाग)

नन्दू की समझदारी(भाग -६)
(गीतात्मक कहानी)

चाचा की ये बात तो बच्चों
समझ गया फ़िर अपना नन्दू
आजाद करूंगा फ़ौरन इनको
हंस करके फ़िर बोला नन्दू।

पर उनके जाने के बाद
नन्दू फ़िर हो गया उदास
खोया खोया बैठा रहता
देखा करता था आकाश।

इसी तरह बैठा था नन्दू
एक दिन अपने घर के पास
मोती मिट्ठू के बारे में
सोच के नन्दू हुआ उदास।

तभी अचानक हुआ कमाल
खुशी से नन्दू हुआ निहाल
किसी की प्यारी कूं कूं सुन के
देखा उसने पीछे मुड़ के।

मोती खड़ा था पीछे उसके
मिट्ठू पीठ पे बैठा जिसके
मिल के तीनों धमा चौकड़ी
लगे मचाने गांव में फ़िर से ।
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हेमन्त कुमार


बुधवार, 2 सितंबर 2009

नन्दू की समझदारी


(गीतात्मक कहानी)
बहुत पुरानी बात है बच्चों
एक गांव था छोटा सा
उसी गांव के एक कोने में
अपना नन्दू रहता था।

अपना नन्दू छोटा था
छोटा था और भोला था
भाई बहन नहीं थे उसके
मां बापू का अकेला था।

किसके साथ मैं खेलूं कूदूं
उछलूं कूदूं धूम मचाऊं
किससे खाऊं किसे खिलाऊं
नन्दू सोचा करता था।

एक दिन बड़े सबेरे बच्चो
नन्दू निकला घर से बाहर
तभी उसे एक प्यारा पिल्ला
दिख गया अपने घर के बाहर।

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( शेष अगले अंक में )
हेमन्त कुमार