झम झम झम झम
बरसा पानी
आई प्यारी बरखा
रानी
दुखी हुई अब धूप
सुहानी
जब से आई बरखा
रानी ।
झूम झूम कर नाच रहे हैं
सभी
वृक्ष जंगल में
धन्यवाद
देते बादल को
मोर
पपीहे नाच नाच के ।
खेलो कूदो मौज
करो तुम
आज के इस मौसम
में
नाव बना लो इक
कागज की
तैरा दो उसको
पानी में ।
लेकिन कर लो
थोड़ी पढ़ाई
नहीं पड़ोगे तुम चिन्ता में
स्कूल
खुलेगा अब जल्दी ही
वहां
भी खेलोगे पानी में ।
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कवियत्री--
नित्या शेफ़ाली
कक्षा-12 –A
सेण्ट
डोमिनिक सेवियो कालेज
लखनऊ








