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गुरुवार, 25 जून 2015

बरखा रानी

झम झम झम झम बरसा पानी
आई प्यारी बरखा रानी
दुखी हुई अब धूप सुहानी
जब से आई बरखा रानी ।


झूम झूम कर नाच रहे हैं
सभी वृक्ष जंगल में
धन्यवाद देते बादल को
मोर पपीहे नाच नाच के ।

खेलो कूदो मौज करो तुम
आज के इस मौसम में
नाव बना लो इक कागज की
तैरा दो उसको पानी में ।

लेकिन कर लो थोड़ी पढ़ाई
नहीं पड़ोगे तुम चिन्ता में
स्कूल खुलेगा अब जल्दी ही
वहां भी खेलोगे पानी में ।
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कवियत्री--
नित्या शेफ़ाली
कक्षा-12 –A
सेण्ट डोमिनिक सेवियो कालेज
लखनऊ





मंगलवार, 31 दिसंबर 2013

नए साल की नई कहानी

पर्वत -सागर -माटी - पानी
नए साल की  रचो- कहानी ।

खेत हमे दें अन्न ढ़ेर सा
जल से भरें हो पोखर- ताल ।
बाग- बगीचे हरे भरें हों ,
फूलों की  सुरभित जयमाल ।
कोयल गाये गीत ख़ुशी के ,
लगे प्रकृति की  रानी ।
नए साल की  नई कहानी ।

 
नदियां दें  सन्देश सृजन  का
चलते रहना आठों याम
अमृत बरसे बदल बनकर
इंद्रधनुष सी होवे शाम।
हर दिन कथा -कहानी लेकर
आये प्यारी नानी ।
नये साल की सुनो कहानी।

सारा जग अपने घर जैसा
बैर भाव का रहे ना  नाम
 
मिल-  जुल कर दुनिया को बदलें
कठिन नहीं है कोई काम ।
आशा -नव उल्लास बिखेरो
बन जाये हर डगर सुहानी
नए साल की बनो कहानी । ।
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कौशल
  पाण्डेय 
सहायक निदेशक 
आकाशवाणी
गोरखपुर -253001
mob -09389462070