
सिंहराज को चढ़ा बुखार
टेम्प्रेचर था एक सौ चार
दर्द हुआ फ़िर पेट में भारी
समझ न पाये वे बीमारी।
धीरे धीरे सिर चकराया
सिर चकराते मन घबराया
वैद्य राज हाथी फ़िर आये
जड़ी बूटियां ढेरों लाये।
रात कौन सी दावत छानी
कहां पिया फ़िर तुमने पानी
सच सच तुम बतलाना भाई
सुनी बात तब डांट लगाई।
गंदा खाना --- गंदा पानी
क्यों करते ऐसी नादानी
अगर चाहते सुख से जीना
अच्छा खाना --- अच्छा पीना।
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कवि –कौशल पाण्डेयहिन्दी अधिकारी
आकाशवाणी,शिवाजीनगर
पुणे—411005


