
सुबह सबेरे जंगल में
मचा हुआ था हंगामा
तिरछे मिरछे कूद रहे थे
अपने प्यारे बन्दर मामा।
खीस निपोरे बंदरिया मामी
नीचे बैठी चिल्लाई
सूझा क्या सनकी बन्दर को
जाने किसकी शामत आयी।
हँसे जोर से भालू दादा
बंदरिया की सुनके बात
बात न समझेंगे अब मामा
नहीं होश में अपने आज।
शेर के घर होली की दावत
सबने खूब किया हुड दंग
मामा अब क्यों रहते पीछे
छक कर पी ली भंग।
---------
मचा हुआ था हंगामा
तिरछे मिरछे कूद रहे थे
अपने प्यारे बन्दर मामा।
खीस निपोरे बंदरिया मामी
नीचे बैठी चिल्लाई
सूझा क्या सनकी बन्दर को
जाने किसकी शामत आयी।
हँसे जोर से भालू दादा
बंदरिया की सुनके बात
बात न समझेंगे अब मामा
नहीं होश में अपने आज।
शेर के घर होली की दावत
सबने खूब किया हुड दंग
मामा अब क्यों रहते पीछे
छक कर पी ली भंग।
---------कवियत्री:पूनम
झरोखा .ब्लागस्पाट .कॉम
हेमंत कुमार द्वारा प्रकाशित


