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शुक्रवार, 24 जुलाई 2009

ये दिन




काले काले बादल आये
सूरज के शरमाने के दिन
गर्मी टाटा करके बोली
मेरे हैं अब जाने के दिन।

मोर नाच कर कहता सबसे
आये खुशी मनाने के दिन
बंधन कोई बांध न पाये
नदिया के इठलाने के दिन।

पलक झपकते छुट्टी बीती
नई क्लास में जाने के दिन
होमवर्क फ़िर गले पड़ गया
पढ़ने में जुट जाने के दिन।
00000000
गीतकार:कौशल पाण्डेय
हिन्दी अधिकारी
आकाशवाणी ,पुणे ।
मोबाइल न0-:09823198116
हेमन्त कुमार द्वारा प्रकाशित

गुरुवार, 5 मार्च 2009

बालगीत




आज का ताजा है अख़बार
खबरें छपी मसालेदार।

शादी करने बन्दर मामा
लेकर चले बारात
मचल गए वे बीच राह में
कर बैठे उत्पात
अड़े हुए थे एक बात पर
पहले दहेज़ में कार।
आज का ताजा है अख़बार....।

उल्लू चोंच दबा कार भागा
नेताजी की टोपी
नेताजी को गुस्सा आया
ले ली मदद पुलिस की
नेताजी ने लड़ा मुकदमा
गए बेचारे हार।
आज का ताजा है अख़बार।

चुहिया चोरी करके लाई
एक मेम की साड़ी
प्रेमी चूहे के संग पकड़ी
दूर देश की गाड़ी
बीच राह चूहे ने छोड़ा
कौन लगाये पार।
आज का ताजा है अख़बार।

हुआ शहर में एक हादसा
लोग रह गए दंग
हाथी से टक्कर लेने को
मच्छर पहुँचा पीकर भंग
शेष हाल कल के पन्नों पर
भूल न जाना यार।
आज का ताजा है अख़बार ।
********
कवि-कौशल पांडेय
हिन्दी अधिकारी
आकाशवाणी,पुणे(महाराष्ट्र)
मोबाईल न:09823198116
पोस्टेड बाई-हेमंत कुमार

शनिवार, 28 फ़रवरी 2009

बैलगाड़ी


चर्र चूँ चर्र चूँ
चर्र चूँ चर्र चूँ
गीत सुनाए बैलगाड़ी।
ढेरों बोझा
और सवारी
पीठ पे लादे बैलगाड़ी।
चर्र चूँ…………….....।

कच्ची हों
या पक्की सड़कें
झूम के चलती बैलगाड़ी।
गावं शहर
कस्बे के रस्ते
नाप रही है बैलगाड़ी।
चर्र चूँ…………….....।

सूखे जब
पहियों का तेल
गा के मांगे बैलगाड़ी।
थक जाते जब
इसके बैल
रुक जाती है बैलगाड़ी।


चर्र चूँ चर्र चूँ
गीत सुनाए बैलगाड़ी।
००००००००००
हेमंत कुमार



सोमवार, 23 फ़रवरी 2009

कौवे का स्कूल


कौवे ने इक पेड़ के नीचे
खोल लिया स्कूल
पहले दिन ही सभी जानवर
बस्ते आए भूल ।


गुस्साए कौवे ने फ़ौरन
उठा लिया बस रूल
लगा पीटने सबको जैसे
झाड़ रहा हो धूल।

भागे भागे सभी जानवर
पहुंचे शेर के पास
शेर ने डाटा जब कौवे को
फेंका उसने अपना रूल।
**********
हेमंत कुमार

शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2009

हवा चली


वा चली भई हवा चली
सर सर सर सर हवा चली
फर फर फर फर हवा चली।

धूम मचाती हवा चली
रंग उड़ाती हवा चली
खुशियाँ ले कर हवा चली
बांसों के झुरमुट से भइया
गीत सुनाती हवा चली।
हवा चली………………।




पतंग उड़ाती हवा चली
गुब्बारे ले हवा चली
पंखे झलती हवा चली
फूलों से खुशबू ले करके
उसे बाँटने हवा चली।

हवा चली भई हवा चली
सर सर सर सर हवा चली
फर फर फर फर हवा चली.
***************
हेमंत कुमार

बुधवार, 11 फ़रवरी 2009

ताक धिना धिन

ताक धिना धिन ताक धिना धिन
भालू करता ताकधिनाधिन
बन्दर फुनगी पर जा पहुँचा
नाच के बोला ताक धिना धिन।

कोयल जोर जोर से कूकी
तोता छोड़ के आया काम।
गधे की चीपों चीपों सुन के
घोड़ा दौड़ा हिन् हिन् हिन्।

गुफा से चीता बाहर आया
हाथी सूंड उठा चिल्लाया।
सोया जंगल जाग उठा जब
शेर भी नाचा ताक धिना धिन।

ताक धिना धिन ताक धिना धिन
भालू करता ताक धिना धिन।
***************
हेमंत कुमार

बुधवार, 4 फ़रवरी 2009

बालगीत

बन्दर जी की चिंता
कंप्यूटर पर बैठे देखो
अपने प्यारे बन्दर जी
गूगल सर्च पे क्लिक किया
और लगे ढूँढने जंगल जी।

पूरब ढूँढा पश्चिम ढूँढा
उत्तर दक्खिन घूमे जी
दुनिया का हर कोना ढूँढा
नहीं मिला पर जंगल जी।

चिंता हुयी उन्हें फ़िर भारी
पायें कहाँ चुकंदर जी
कट जायेंगे जंगल सारे
रहें कहाँ सब बन्दर जी।
**********************
हेमंत कुमार

रविवार, 1 फ़रवरी 2009

मेरा घर


कितना प्यारा कितना सुंदर
सबसे अच्छा है मेरा घर।

राजाओं के महलों जैसा
नहीं बना है मेरा घर
फ़िर भी मैं रहता हूँ इसमें
क्योंकि यह है मेरा घर।
कितना प्यारा.....................

रोज सुबह खपरैले पर आ
गौरैया एक गीत सुनाती
हुआ सबेरा उठ जाओ तुम
कह कर के वह मुझे जगाती।
कितना प्यारा………...........

दौड़ दौड़ जब थक जाता मैं
मेरी मैया मुझे बुलाती
प्यार से अपनी गोद में लेकर
लोरी गाकर मुझे सुलाती।

कितना प्यारा कितना सुंदर
सबसे अच्छा है मेरा घर।
००००००००००००००००००
हेमंत कुमार