शुक्रवार, 11 सितंबर 2009

नन्दू की समझदारी(भाग-५)

नन्दू की समझदारी(भाग-५)
(गीतात्मक कहानी)

कुछ ही दिनों के बाद वहां पर
नन्दू के चाचा जी आये
मोती मिट्ठू की हालत को
देख के चाचा जी मुस्काये।

सोच के कुछ चाचा ने बच्चों
फ़िर नन्दू को पास बुलाया
मोती मिट्ठू के बारे में
प्यार से उसको समझाया।

जैसे इस धरती पर नन्दू
हम मानव रहते आजाद
वैसे ही इस पूरे जग में
हर प्राणी रहता है आजाद ।

अगर बांध कर रखोगे उनको
पिंजरे रस्सी में कसोगे उनको
नहीं रहेंगे खुश ये कभी भी
ना बन सकेंगे दोस्त कभी भी।

अगर इन्हें तुम सच्चा दोस्त
बनाना चाह रहे हो अपना
आजाद करो तुम इन दोनों को
फ़िर देखो खुश होते ये कितना।
०००००००००००
(शेष अगले भाग में )
हेमन्त कुमार

मंगलवार, 8 सितंबर 2009

नंदू की समझदारी -(भाग-४)


नन्दू की समझदारी (भाग -४)
(गीतात्मक कहानी)

कुछ ही दिनों के बाद तो बच्चों
नन्दू एक तोता घर लाया
नाम दिया उसको मिट्ठू और
सुन्दर पिंजरे में बैठाया।

अब मिट्ठू और मोती के संग
नन्दू खेला करता था
मोती को तो दाल और रोटी
मिट्ठू को मिर्च खिलाता था।

रस्सी पिंजरे में बंध बच्चों
मोती मिट्ठू हुये उदास
खाना पीना छोड़ के दोनों
देखा करते थे आकाश।

मोती और मिट्ठू की हालत
देख के नन्दू हुआ उदास
खुश रक्खूं मैं कैसे इनको
सोचा करता सारी रात।
०००००००
(शेष अगले अंक में )
हेमंत कुमार

रविवार, 6 सितंबर 2009

नन्दू की समझदारी(भाग -३)

नन्दू की समझदारी(३)
(गीतात्मक कहानी)

पर मोती को एक दिन बच्चों
बांधा रस्सी में नन्दू ने
चल तुझको मैं गांव घुमाऊं
समझाया उसको नन्दू ने।

आगे आगे तो नन्दू था
पीछे ही उसके मोती था
नन्दू उसको खींच रहा था
मोती पें पें चीख रहा था।

गुस्सा होकर फ़िर नन्दू ने
मोती को ला घर में बांधा
बंध जाने से मोती की तो
आजादी में आयी बाधा ।

घर में बंध जाने से बच्चों
मोती रहने लगा उदास
नया दोस्त एक मोती का फ़िर
नन्दू करने लगा तलाश।
०००००
( शेष अगले अंक में )
हेमंत कुमार

शुक्रवार, 4 सितंबर 2009

नन्दू की समझदारी(भाग -२)

नन्दू की समझदारी
(गीतात्मक कहानी)

घर के बाहर दिखा जो पिल्ला
प्यारा सुन्दर झबरा पिल्ला
भूल गया दुख सारे नन्दू
दौड़ के गोद में ले लिया पिल्ला।

पिल्ला ले घर पहुंचा नन्दू
दौड़ के मां से रोटी लाया
फ़िर पिल्ले को गोद में ले के
लगा खिलाने रोटी नन्दू।

रोटी दाल खिला पिल्ले को
लगा सोचने बैठ के नन्दू
क्या रक्खूं मैं इसका नाम
मोती शेरा या फ़िर चन्दू ।

मोती कहकर लगा बुलाने
प्यारे पिल्ले को फ़िर नन्दू
सुबह शाम संग मोती के ही
खेला करता अपना नन्दू।
( शेष अगले अंक में )
००००००००००००
हेमंत कुमार



बुधवार, 2 सितंबर 2009

नन्दू की समझदारी


(गीतात्मक कहानी)
बहुत पुरानी बात है बच्चों
एक गांव था छोटा सा
उसी गांव के एक कोने में
अपना नन्दू रहता था।

अपना नन्दू छोटा था
छोटा था और भोला था
भाई बहन नहीं थे उसके
मां बापू का अकेला था।

किसके साथ मैं खेलूं कूदूं
उछलूं कूदूं धूम मचाऊं
किससे खाऊं किसे खिलाऊं
नन्दू सोचा करता था।

एक दिन बड़े सबेरे बच्चो
नन्दू निकला घर से बाहर
तभी उसे एक प्यारा पिल्ला
दिख गया अपने घर के बाहर।

00000000
( शेष अगले अंक में )
हेमन्त कुमार

बुधवार, 5 अगस्त 2009

बालगीत -बन्दर जी


कुछ बन्दर मेरे बाग में आये
धमाचौकड़ी खूब मचाये
पेड़ से तोड़ के पत्ती खाये
पापा जी को गुस्सा आए।

नजर पड़ी उनकी गमलों पर
लगे नोचने फ़ूलों को सब
बन्दरों ने गिराई गमले की माटी
पापा ने दे मारी लाठी ।

दुम दबा कर बन्दर भागे
पापा पीछे बन्दर आगे
बन्दर बोले पें पें पें पें
हम सब बोले हें हें हें हें ।
00000
कु0 नित्या शेफ़ाली का बाल गीत
हेमन्त कुमार द्वारा प्रकाशित

रविवार, 2 अगस्त 2009

आज हमारी छुट्टी है

आज हमारी छुट्टी है
स्कूल से हो गयी कुट्टी है।

सब कुछ उल्टा पुल्टा घर में
झाड़ू पोंछा बर्तन पल में
अब पापा निपटायेंगे
मां की हो गयी छुट्टी है।
आज हमारी छुट्टी-------।

पार्क में सब मिल जायेंगे
मौजें खूब मनायेंगे
हरी घास फ़ूलों के नीचे
सोंधी सोंधी मिट्टी है।
आज हमारी छुट्टी-------।

झूले पतंग और खेल खिलौने
पापा मम्मी भैया दीदी
गोलगप्पे और आलू टिक्की
चटनी सबमें खट्टी है।
आज हमारी छुट्टी है
स्कूल से हो गयी कुट्टी है।
0000000
हेमन्त कुमार