शनिवार, १४ नवम्बर २००९

फरियाद


काली कोट में लाल गुलाब,
चाचा तुमको करते याद,
बाल दिवस हम संग मनायें,
बस इतनी सुन लो फ़रियाद।

बचपन क्यों अब रूठा रहता,
हर बच्चा क्यों रोता रहता,
आओ चाचा नेहरू आओ,
सारे जहां को तुम बतलाओ।

खेल खिलौने साथ छीन कर,
क्यूं सब हमें रुलाते हैं,
भारी बस्तों और किताबों,
में हमको उलझाते हैं।

क्या हमने कुछ गलत किया है,
जिसकी हमको सजा मिली है,
प्यारे थे सब बच्चे तुमको,
सुन लो इनकी ये फ़रियाद।

आओ चाचा नेहरू आओ,
जन्म दिवस हम संग मनाओ।
000
पूनम

गुरुवार, ५ नवम्बर २००९

मेरा देश भारत


इन्साफ़ की डगर पे,
बच्चों दिखाओ चल के
ये देश है तुम्हारा,
नेता तुम्हीं हो कल के॥

जी हाँ,ये शब्द आपने कही कही सुना या पढ़ा होगा। फ़िर घर के किसी कोने में फ़ेंक दिया होगा।
ये दुनिया ही ऐसी है। कोई अच्छी या ढंग की बात पढी, फ़िर थोडी देर उस पर बात की फ़िर फ़ेंक दिया। लेकिन सोचिए, आज के इस युग में कितना कुछ बदला है।62 साल पहले जहां लोगों ने आज़ादी के लिये खून बहाया,उसी ज़मीन पर आज लोग अपनों को,मार रहे हैं।सच तो शायद ही भारत के किसी कोने में है। आजकल तो लोगों को पता ही नहीं रहता कि वे क्या कर रहे हैं टेररिज़्म जैसी कई चीज़ें बढती ही चली जा रही हैं।आज लोग एक सच छुपाने के लिये हज़ार झूठ बोलते हैं। बहुत सी बाहरी शक्तियाँ भारत को कमज़ोर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं।
क्या ऐसे ही हमारा देश तरक्की करेगा?मैं पूछती हूंक्यों और कब तक इस आतंकवाद के डर से हम बच्चे पढना बन्द करेंगे,लोग घरों से बाहर निकलना बन्द करेंगे ?क्या किसी में भी देश के लिये लड़ने की हिम्मत नहीं है?इस तरह से तो हम सब कायर कहलायेंगे।
नहीं !!!!!!ऐसा नहीं होगा। हम लड़ेंगे,जरूर लड़ेंगे !!!!!! हमारे अन्दर लडने की वो आग है। अगर कोई मुश्किल है तो उसे भी हल करेंगे। हाँ !! भारत के लोगों जागोहम दिखा देंगे कि हमारा भारत कमज़ोर नहीं है। आज हम सब मिल कर ये संकल्प लें
हम एक थे,एक हैं और एक रहेंगे।
हम नन्हे बालक भारत की तस्वीर बनेंगे।
बदले हुए भारत की हम तकदीर बनेंगे
जय हिन्द
00000
लेखिका ---नित्या शेफ़ाली का लेख

हेमन्त कुमार द्वारा प्रकाशित्।

मंगलवार, २० अक्तूबर २००९

मछली रानी


छम छम बहता देखो पानी
उसमें तैरे मछली रानी।

कभी भाग कर जाती नीचे
कभी झांकती है ये ऊपर
मुंह में अपने भरकर पानी
खेल दिखाती मछली रानी।

चाहे हो नदिया का पानी
या हो समन्दर गहरा पानी
सभी जगह पर रह लेती है
अपनी प्यारी मछली रानी।

नीली पीली या सतरंगी
जल जीवों की है यह संगी
बिन पानी के रह ना पाती
सुन्दर प्यारी मछली रानी।

छम छम बहता देखो पानी
उसमें तैरे मछली रानी
०००
हेमन्त कुमार



शुक्रवार, १६ अक्तूबर २००९

दीवाली


दिया रोशनी खील बताशा
फ़सलों से महका परिवेश
नहीं पटाखे आतिशबाजी
दीवाली का यह संदेश।

दीपों के इस नव प्रकाश में
नए विश्व की करो कल्पना
हरी भरी होवे यह धरती
सात रंगों की लगे अल्पना।

नई तरंगें नई उमंगें
नव आशा नूतन संकल्प
खोजेंगे हम नई दिशायें
नये सृजन के नये विकल्प।

शीतल मंद हवायें आकर
धरती को दुलरायेंगी
बोली एक प्रेम की बोलो
सबसे कहकर जायेंगी।
000
कवि: कौशल पाण्डेय
हिन्दी अधिकारी
आकाशवाणी,शिवाजीनगर
पुणे
मोबाइल न0- 09823198116

(श्री कौशल पाण्डेय हिन्दी के प्रतिष्ठित बाल साहित्यकार हैं।बाल नाटकों,कहानियों,गीतों के साथ ही आपकी बड़ों के लिये भी अब तक कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वर्तमान समय में आप आकाशवाणी के पुणे केन्द्र पर हिन्दी अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।)
हेमंत कुमार द्वारा प्रकाशित

शनिवार, १० अक्तूबर २००९

जी करता जोकर बन जाऊं




जोकर मुझे बना दो जी
मोटी तोंद लगा दो जी।

नाक गाल को खूब सजाकर
गोल गोल गेंदें चिपकाकर
बन्दर जैसे दांत दिखाकर
रोतों को भी खूब हंसाकर।

हंसा हंसा कर आंसू लाऊं
जी करता जोकर बन जाऊं

जोकर मुझे बना दो जी
मोटी तोंद लगा दो जी।


तरह तरह के खेल दिखाकर
उल्टा सीधा मुंह बना कर
कानों में चप्पल लटकाकर
छोटी सी एक पूंछ लगाकर

बच्चों का टट्टू बन जाऊं
जी करता जोकर बन जाऊं।

जोकर मुझे बना दो जी
मोटी तोंद लगा दो जी।
***
कवि :दिविक रमेश
श्री दिविक रमेश हिन्दी साहित्य के प्रतिष्ठित कथाकार,कवि,एवम बालसाहित्यकार हैं।
आपकी अब तक कविता,आलोचनात्मक निबन्धों,बाल कहानियों,बालगीतों की 50 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।तथा आप कई राष्ट्रीय एवम अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किये जा चुके हैं।वर्तमान समय में आप दिल्ली युनिवर्सिटी से सम्बद्ध मोती लाल नेहरू कालेज में प्राचार्य पद पर कार्यरत हैं ।(हेमन्त कुमार द्वारा प्रकाशित)।

रविवार, ४ अक्तूबर २००९

अमरूद


गोले गोले
मीठे मीठे
पीले रंग के ये अमरूद।

पीले रंग पे
लाल बिन्दियों
वाले ये सुन्दर अमरूद ।

घर के पीछे
बाग में मेरे
खूब फ़ले देखो अमरूद।

तोता मैना
चिड़िया आकर
रोज सुबह खातीं अमरूद।

मेरा मिट्ठू
रोज सबेरे
मुझसे मांगे है अमरूद।

अम्मा बाबू
दादा दादी
सब खाते मीठे अमरूद।

गोले गोले
मीठे मीठे
पीले रंग के ये अमरूद।
*****
हेमन्त कुमार

गुरुवार, २४ सितम्बर २००९

बालगीत - केला


ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला

हरे भरे पेड़ों से भैया
बन्दर जी ने तोड़ा केला
पीला पीला मीठा केला
बन्दर जी ने खाया केला।
ला ला-----------------।

अम्मा बाबू भैया दीदी
सबको भाता है केला
क्योंकि चीनी से भी मीठा
होता है पीला केला।
ला ला-----------------।

पीले छिलके को छीलो तो
निकलेगा मीठा केला
बिन दांतों वाले बाबा भी
खाते हैं मीठा केला।

ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला
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हेमन्त कुमार