मंगलवार, 14 अप्रैल 2009

गर्मी आई

जाड़ा गया लो गर्मी आई
बरफ मलाई संग में लाई।

दिन छोटे से बड़े हुए अब
रातें हो गयीं छोटी
बन्दर जी ने सिल बट्टे पर
ठंढाई है घोटी।


भालू भी क्यों रहता पीछे
उसने ली अंगडाई
झट से पहुँचा नदी किनारे
डुबकी एक लगाई।

घोड़े को जब कुछ न सूझा
उसने दौड़ लगाई
गधे ने अपने पैर पटक कर
ढेरों धूल उड़ाई।

जाड़ा गया लो गर्मी आई
बरफ मलाई संग में लाई।
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हेमंत कुमार

3 टिप्‍पणियां:

  1. जाड़ा भागा, गरमी आई।
    पंखें-कूलर लेकर आई।
    सबकी पहली पसन्द बनी है,
    ठण्डी लस्सी और मलाई,
    लेकिन बच्चों को गरमी में,
    आइसक्रीम लगती सुखदाई।

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  2. अनूठी बाल-कविता...
    आपका ये प्रयास अतुलनीय है

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  3. bahut sunder! just like kids.. aajkal baccho ke liye poetry kaha kartey hain log .... aise mein aap ke ye rachna .... subhaan allah

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