शुक्रवार, 12 जून 2009

सूरज


रोज सबेरे आता सूरज,
हंसता और मुस्काता सूरज,
अंधियारे को दूर भगाकर,
उजियारे को लाता सूरज।
रोज सबेरे--------------।

कभी सुनहली कभी लाल और,
पीली गेंद बनाता सूरज,
रोज सबेरे पूरब में उग,
शाम को पश्चिम जाता सूरज।
रोज सबेरे------------------।

धूप रोशनी गर्मी देकर,
जाड़ा दूर भगाता सूरज,
सतरंगी किरणों से अपनी,
नई छटा बिखराता सूरज।
रोज सबेरे आता सूरज,
हंसता और मुस्काता सूरज।
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हेमन्त कुमार

3 टिप्‍पणियां:

  1. Bal lekhan hindi me ek upekshit si vidha hai.Aise me koi bhi prayas taza hawa ke jhonke sa jaan padta hai.

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  2. बहुत सुंदर और प्यारी कविता लिखा है आपने जो प्रशंग्सनीय है!

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  3. pyaari kavitaa है...... hemant जी.....
    sooraj तो aasha का sandesh देता है

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