मंगलवार, 5 मई 2009

बालगीत - बरफ मलाई



बरफ मलाई बरफ मलाई,
ठंढी मीठी बरफ मलाई,
गरमी में सबको भाती है ,
रंग बिरंगी बरफ मलाई।

गली में टुन टुन घंटी सुनकर,
दौडे मुनिया राजू भाई,
फ़िर सबने हुडदंग मचाई,
हमको बरफ खिलाओ भाई।

घिस घिस करके काका ने फ़िर ,
सबको मीठी बरफ खिलाई,
मुनिया क्यूं रूठी काका से,
उसको खांसी आती भाई।



बरफ मलाई बरफ मलाई,
ठंढी मीठी बरफ मलाई।
*********
हेमंत कुमार

7 टिप्‍पणियां:

  1. गर्मी में बच्चों को,
    अच्छी लगती बरफ-मलाई।
    मम्मी-पापा दिलवाते हैं,
    उनको, बरफ-मलाई।।
    ठण्डी-ठण्डी, बरफ-मलाई,
    दादी-अम्मा जी को भाई।
    गली-गली में बेच रहे है,
    दादा बरफ-मलाई।
    सुन्दर बाल गीत लिखने की,
    तुमको बहुत बधाई।

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  2. मेरी बेटी को बहुत मज़ा आया और बचपन जहाँ से भी झांके,मुझे भी बहुत सुकून मिलता है ......

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  3. प्रिय बन्धु /वर्तमान इश्क मोहब्बत ,चाँद तारे ,हुस्नोइश्क , के दौर में आपकी बल कवितायेँ मन मोह लेती है /बडा अभाव हो गया है बाल गीत बाल कहानियों का /घिस घिस कर मीठी बरफ खिलाई इसमें ग्रामीण परिवेश का चित्रण भी हो गया है वरना तोबच्चे पैकबंद डिब्बे की ही चीज़ को आइसक्रीम समझते है /बाल गीत बहुत अच्छा लगा

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  4. aap baccho ke liya kavita likhtey hain .... padh kar jaan kar accha laga.....warna aaj ke daur mein to badlte parivesh ke karan bachpan jaldi hi vida ho jata hain

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  5. आपको मेरी शायरी पसंद आई और आपकी सुंदर टिपण्णी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया !
    बहुत ही ख़ूबसूरत ब्लॉग है ये आपका ! बड़े दिनों बाद इतना बढ़िया कविता और वो भी बच्चों को लेकर आपने लिखा है सच में बेहद पसंद आया!
    आप मेरा ये ब्लॉग परियेगा !
    http://urmi-z-unique.blogspot.com
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  6. कितनी प्यारी कविता है हेमंत जी। साधुवाद।

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  7. गली में टुन टुन घंटी सुनकर,
    दौडे मुनिया राजू भाई,
    फ़िर सबने हुडदंग मचाई,
    हमको बरफ खिलाओ भाई।

    bahut sunder rachna hai...

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