सोमवार, 30 मई 2011

रेल गाड़ी

चित्र-- राजीव मिश्र

कू कू करती
धुआं उड़ाती
चलती जाती रेलगाड़ी।

झंडी लाल दिखे
जैसे ही
रुक जाती है रेलगाड़ी
झंडी हरी देख के भैया
फ़िर चल पड़ती रेलगाड़ी।

अपनी पटरी पर
ही चलती
नहीं भागती
इधर उधर
मीलों दूरी तै करके भी
थकती नहीं है रेल गाड़ी।

कू कू करती
धुआं उड़ाती
चलती जाती रेलगाड़ी।
000
हेमन्त कुमार

19 टिप्पणियाँ:

  1. बहुत सुंदर कविता वाह वाह वाह ......

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  2. बहुत बढ़िया.... अच्छी बाल कविता....

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  3. बेनामीMay 30, 2011 07:21 PM

    कू कू करती
    धुआं उड़ाती
    चलती जाती रेल।

    झंडी लाल दिखे जैसे ही
    रुक जाती है रेल
    और देख कर हरी को भैया
    फ़िर चल पड़ती रेल।

    अपनी ही पटरी पर चलती
    नहीं भागती
    इधर उधर
    मीलों दूरी तै करके भी
    थकती नहीं है रेल।

    कू कू करती
    धुआं उड़ाती
    चलती जाती रेल।

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  4. मेरे ब्लॉग पर आकर टिप्पणी देकर प्रोत्साहित करने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया! मेरी शायरी और कविता के ब्लॉग पर भी आपका स्वागत है!
    बहुत सुन्दर रचना! मैं तो अपने बचपन के दिनों को याद करने लगी!

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  5. अच्छी रचना और बच्चों के लिए अच्छा ब्लॉग

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  6. रोचक . मनभावन .बाल कविता . प्रस्तुति बहुत सुंदर . मेरी शुभकामनाएँ

    चूहेमल का देखो खेल

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  7. हेमंत जी सुन्दर बाल कविता मन कहता है मै भी घूमूँ छुक छुक छुक छुक रेलगाड़ी -अशोक दादा जी का गाना रेलगाड़ी रेलगाड़ी याद करा दिया आप ने
    शुक्ल भ्रमर५

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  8. अच्छी व सार्थक फुलबगिया है...

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  9. sach main aapne bachpan ke din yaad dila diya... kash phir se bachpan laut aata...

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  10. मान्यवर , फुलबगिया पर कुछ नया पढने की उत्सुकता है .
    नीले आसमान पर छा,

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  11. आपकी किसी पोस्ट की चर्चा होगी कल शनिवार (१६ -०७-११)को नयी-पुराणी हलचल पर |कृपया आयें और अपने सुझाव दें....!!

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