शनिवार, 31 मई 2014

टूटा सिंहराज का वादा

सिंहराज ने खबर सुनी जब
शाकाहारी जीते ज्यादा
चिंता हुयी उन्हें फ़िर भारी
क्या मेरी बस उमर है आधा।

शाकाहारी बनूं अगर तो
मार्ग में आयें ढेरों बाधा
कौन लाएगा भोजन मेरा
घट के वजन भी होगा आधा।

बुला के जंगल के जीवों को
किया तुरत उनसे इक वादा
मांस नहीं खाऊंगा अब मैं
फ़लाहार बस करूंगा सादा।

बैठ गुफ़ा के बाहर अपनी
सोच रहा क्या खाऊं सादा
खरगोश देख के लालच आयी
तोड़ दिया फ़िर अपना वादा।
000

डा0हेमन्त कुमार

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस' प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (01-06-2014) को "प्रखर और मुखर अभिव्यक्ति (चर्चा मंच 1630) पर भी है!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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  2. सुन्दर बाल रचना हेमंत जी ...

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