शुक्रवार, 13 जून 2014

बरस जाओ अब बादल राजा

सूरज की गर्मी से झुलसे
बंदर भालू और शेर जी
कौवे तोते पाखी चीखे
बरस जाओ अब बादल राजा।

तितली,झींगुर,वीर बहूटी
तड़प रहे बिन पानी सारे
महाबली घड़ियाल भी देखो
बिन पानी के हुये बिचारे।

मछली,कछुओं की तकलीफ़ें
देख के सारे मेढक जुट गये
मेघ मल्हार छेड़ दी सबने
टर्र टर्र का बजा के बाजा।
 जोर जोर फ़िर हवा चली जो
आसमान ने रंग जो बदला
गूंज उठा मेघों का राग
खुशी हुये फ़िर बादल राजा
झूम के बरसे बादल राजा।
0000
डा0हेमन्त कुमार


4 टिप्‍पणियां:

  1. पेंटिंग बहुत अच्छी है आपने कविता में रंग भर दिया बहुत खूब |

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस' प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (15-06-2014) को "बरस जाओ अब बादल राजा" (चर्चा मंच-1644) पर भी होगी!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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