रविवार, 6 जुलाई 2014

छपाक छैया ताल तलैया

                                               
 छपाक छैया ताल तलैया
मेघा बरसे जोर से भैया
कागज नाव पे सपने तैरें
सारे बच्चे खेते नैया।
छपाक छैया------
                    
भीगे तन पे गीला गमछा
खेलें सब मिल छुपम छुपैया
मेढक झींगुर के गीतों से
तान मिलाती सारी गैया।
छपाक छैया------


भाड़ की गर्मी पा के देखो
दाने नाचें ता ता थैया
स्कूल में छुट्टी आज हुयी है
शाम कहानी कहेंगे भैया।
छपाक छैया------
0000

डा0हेमन्त कुमार




5 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर चित्रों से सजी, सुंदर रचना!

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (12-07-2014) को "चल सन्यासी....संसद में" (चर्चा मंच-1672) पर भी होगी।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. सुन्दर रचना प्रस्तुति

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

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