गुरुवार, 28 मई 2015

गर्मी गर्मी------।

गर्मी से जब तंग हो गये
बंदर चीता भालू
जंगल से नदिया तट पहुंचे
किया नहाना चालू।

छपक छपक पानी में सबने
खूब उछाली बालू
भूख लगी तीनों ने मिलकर
खेत में खाई आलू।

रखवाला डंडा ले दौड़ा
सामने दिख गया भालू
चीता बंदर भाग गये पर
भालू का बना कचालू।
0000

डा0हेमन्त कुमार

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (30-05-2015) को "लफ्जों का व्यापार" {चर्चा अंक- 1991} पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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