सोमवार, 4 अप्रैल 2016

तितली से---।

तितली से---।

तितली रानी बाग में मेरे
फ़ूल खिले हैं प्यारे
तुमको आता देख के कैसे
खिल खिल करते सारे।

मेरा नन्हां भैया कैसे
देखो तुम्हें निहारे
कूद कूद अपनी गाड़ी से
हरदम तुम्हें पुकारे।

मखमल जैसे रंग बिरंगे
कोमल पंख तुम्हारे
अगर मुझे भी मिल जाते तो
उड़ती संग तुम्हारे।

एक बात मुझको बतलाओ
रंग कहां से लाती प्यारे प्यारे
अगर मुझे भी लाकर दे दो
रंग लूं  अपने घर को सारे।
000

डा0हेमन्त कुमार

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (06-04-2016) को "गुज़र रही है ज़िन्दगी" (चर्चा अंक-2304) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बहुत ही सुंदर और प्यारी कविता। यह बच्चों को जरूर पसंद आएगी।

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