मंगलवार, 10 मई 2016

कहां छुपे हो बादल भैय्या----।

सूखी धरती सूखी नदियां
सूख गये सब ताल तलैया
हवा में उड़ते पाखी चीखे
अब तो गुस्सा छोड़ो भैय्या।
कहां छुपे हो बादल भैय्या।

आग उगलती हवा में देखो
जीव सभी अब झुलस रहे हैं
थोड़ी दया करो अब सब पर
छाया थोड़ी कर दो भैय्या।
कहां छुपे हो बादल भैय्या।

टप टप करता गिरे पसीना
पर्वत जंगल चैन कहीं ना
सूरज से समझौता कर लो
बारिश थोड़ी कर दो भैय्या।
कहां छुपे हो बादल भैय्या।
000

डा0हेमन्तकुमार

5 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 12-05-2016 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2340 में दिया जाएगा
    धन्यवाद

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