सूखी धरती सूखी नदियां
सूख गये सब ताल तलैया
हवा में उड़ते पाखी चीखे
अब तो गुस्सा छोड़ो भैय्या।
कहां छुपे हो बादल भैय्या।
आग उगलती हवा में देखो
जीव सभी अब झुलस रहे हैं
थोड़ी दया करो अब सब पर
छाया थोड़ी कर दो भैय्या।
कहां छुपे हो बादल भैय्या।
टप टप करता गिरे पसीना
पर्वत जंगल चैन कहीं ना
सूरज से समझौता कर लो
बारिश थोड़ी कर दो भैय्या।
कहां छुपे हो बादल भैय्या।
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डा0हेमन्तकुमार







