शुक्रवार, 1 जुलाई 2016

संगीतकार कोयल

कोयल का गाना सुन बोले
इक दिन भालू दादा
ले लो तुम अब एक पियानो
दाम नहीं कुछ ज्यादा।

भाग के दोनों शहर को पहुंचे
 दूर नहीं था ज्यादा
देख समझ के पसंद किया फ़िर
एक पियानो बाजा।

पैसे लाई थी कम कोयल
दाम थे थोड़े ज्यादा
सिटी बैंक का कार्ड निकाले
फ़ौरन भालू दादा।

जंगल में फ़िर धूम मच गयी
कोयल लाई बाजा
झूम झूम कर कोयल गाती
संगत दें भालू दादा।
000
डा0हेमन्त कुमार


5 टिप्‍पणियां:

  1. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (03-07-2016) को "मीत बन जाऊँगा" (चर्चा अंक-2392) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं