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गुरुवार, 25 जून 2015

बरखा रानी

झम झम झम झम बरसा पानी
आई प्यारी बरखा रानी
दुखी हुई अब धूप सुहानी
जब से आई बरखा रानी ।


झूम झूम कर नाच रहे हैं
सभी वृक्ष जंगल में
धन्यवाद देते बादल को
मोर पपीहे नाच नाच के ।

खेलो कूदो मौज करो तुम
आज के इस मौसम में
नाव बना लो इक कागज की
तैरा दो उसको पानी में ।

लेकिन कर लो थोड़ी पढ़ाई
नहीं पड़ोगे तुम चिन्ता में
स्कूल खुलेगा अब जल्दी ही
वहां भी खेलोगे पानी में ।
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कवियत्री--
नित्या शेफ़ाली
कक्षा-12 –A
सेण्ट डोमिनिक सेवियो कालेज
लखनऊ