रविवार, 18 अप्रैल 2010

बिल्ली मौसी



बिल्ली मौसी घर से चली
आंख पे चश्मा हाथ में थैला
बिल्ला मौसा को बाय कहा
और फ़ोन मिलाती आगे चली।

हंस के बोले मौसा जी फ़िर
चटक मटक कर कहां चली
झटक के अपनी झबरी पूंछें
आंख मटका कर झट से बोली।

पहले बालीवुड जाऊंगी
शाहरुख संग फ़िल्म बनाऊंगी
पैसा खूब कमाऊंगी
फ़िर बनारस जाऊंगी।






जा के गंगा में नहाऊंगी
चूहे पकड़ के लाऊंगी
पेट भरकर खाऊंगी
फ़िर वापस मैं आऊंगी।

कवि-कुलेश नन्दन
                        पुत्र श्री वीरेन्द्र सारंग
                     कक्षा-5 बाल गाइड इन्टर कालेज
                                        लखनऊ-

8 टिप्‍पणियां:

  1. कुलेश जी को बहुत बहुत बधाई ......इनकी चर्चा वीरेंद्र सारंग जी ने की थी ....आज आपने इनकी प्रतिभा को 'फूलबगिया' मे जगह देकर बहुत ही सुंदर काम किया है , वीरेंद्र जी आपको भी बधाई ।

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  2. आपकी इस सुन्दर पोस्ट की चर्चा यहाँ भी तो है!
    http://charchamanch.blogspot.com/2010/04/blog-post_19.html

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  3. बहुत प्यारा बाल गीत..मजा आ गया.
    ______________
    'पाखी की दुनिया' में इस बार माउन्ट हैरियट की सैर करना न भूलें !!

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  4. बहुत सुन्दर और प्यारा बाल गीत ! मुझे बेहद पसंद आया! चित्र भी बहुत मज़ेदार लगा !

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