बुधवार, 29 सितम्बर 2010

पहाड़


कहीं पे तो आकाश को छूते
कहीं पे आ धरती पर मिलते
कहीं पे नीचे कहीं पे ऊंचे
ऊंचे नीचे नीचे ऊंचे
 कितने सुन्दर हैं ये पहाड़।

कहीं पे काले कहीं पे भूरे
कहीं बरफ़ से ढके हुये तो
कहीं बड़े पेड़ों में छुपके
हरे भरे दिखते ये पहाड़
कितने सुन्दर हैं ये पहाड़।

कहीं पे कल कल का संगीत
कहीं पे कलरव पाखी का
कहीं दिखे जो देश के दुश्मन
तुरत भुजायें लेते तान
कितने सुन्दर हैं ये पहाड़।
000
  हेमन्त कुमार 

14 टिप्पणियाँ:

  1. han kitne sunder hote hain pahad.... apne to unke har roop ke baare me bataya.....

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  2. कहीं पे कल कल का संगीत
    कहीं पे कलरव पाखी का
    कहीं दिखे जो देश के दुश्मन
    तुरत भुजायें लेते तान
    कितने सुन्दर हैं ये पहाड़।
    ...bahut badiya

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  3. अरे वाह!
    पहाड़ का गीत तो बहुत सुन्दर है!
    --
    इसकी चर्चा तो बाल चर्चा मंच पर भी है!
    http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/10/20.html

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  4. पहाड़ पर लिखी गयी एक खूबसूरत रचना----।

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  5. http://itistimetothinkformyself.blogspot.com/2010/10/october-birthday-wishes-and-awards.html

    have a fun day!

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  6. uma bhatt RUDERPRYAGMar 28, 2011 12:15 AM

    aapne PHAD dekhe or dikhaye,tabhi tao PAHADON ke geet gaye.

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