कहीं पे तो आकाश को छूते
कहीं पे आ धरती पर मिलते
कहीं पे नीचे कहीं पे ऊंचे
ऊंचे नीचे नीचे ऊंचे
कितने सुन्दर हैं ये पहाड़।
कहीं पे काले कहीं पे भूरे
कहीं बरफ़ से ढके हुये तो
कहीं बड़े पेड़ों में छुपके
हरे भरे दिखते ये पहाड़
कितने सुन्दर हैं ये पहाड़।
कहीं पे कल कल का संगीत
कहीं पे कलरव पाखी का
कहीं दिखे जो देश के दुश्मन
तुरत भुजायें लेते तान
कितने सुन्दर हैं ये पहाड़।
000
हेमन्त कुमार







bohut sundar...
प्रत्युत्तर देंहटाएंhan kitne sunder hote hain pahad.... apne to unke har roop ke baare me bataya.....
प्रत्युत्तर देंहटाएंपहाड़ है ताड़ !
प्रत्युत्तर देंहटाएंbahut sundar hai mountain
प्रत्युत्तर देंहटाएंbeautiful image!
प्रत्युत्तर देंहटाएंhave a fun Thursday!
कहीं पे कल कल का संगीत
प्रत्युत्तर देंहटाएंकहीं पे कलरव पाखी का
कहीं दिखे जो देश के दुश्मन
तुरत भुजायें लेते तान
कितने सुन्दर हैं ये पहाड़।
...bahut badiya
अरे वाह!
प्रत्युत्तर देंहटाएंपहाड़ का गीत तो बहुत सुन्दर है!
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इसकी चर्चा तो बाल चर्चा मंच पर भी है!
http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/10/20.html
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प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत सुंदर!
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पहाड़ पर लिखी गयी एक खूबसूरत रचना----।
प्रत्युत्तर देंहटाएंhttp://itistimetothinkformyself.blogspot.com/2010/10/october-birthday-wishes-and-awards.html
प्रत्युत्तर देंहटाएंhave a fun day!
What a simple poem...kids will love it!
प्रत्युत्तर देंहटाएंhave a fun day!
प्रत्युत्तर देंहटाएंaapne PHAD dekhe or dikhaye,tabhi tao PAHADON ke geet gaye.
प्रत्युत्तर देंहटाएंhttp://shayaridays.blogspot.com
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