ठंढा ठंढा आया जाड़ा
कोट रजाई लाया जाड़ा
मुनिया गोलू धूप में खेलें
दादी जी को भाया काढ़ा।
आलू गोभी गरम पराठा
नरम साग बजरी का आटा
मटर की घुंघरी और गरम गुड़
कोल्हू का रस लाया जाड़ा।
रात हुई जब ठंढक बढ़ गई
बाबा ने तपनी सुलगाया
घेर के सारे बच्चे बोले
कहो कहानी भागे जाड़ा।
ठंढा ठंढा आया जाड़ा
कोट रजाई लाया जाड़ा।
--------- हेमन्त कुमार









funny
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत ही सुन्दर ।
प्रत्युत्तर देंहटाएंजाड़े का आनंद दिलाती हुई सुंदर अभिव्यक्ति-
प्रत्युत्तर देंहटाएंशुभकामनायें -
बच्चों की सुन्दर कविता.
प्रत्युत्तर देंहटाएंऔर क्या कहें:-
जाड़ा जाड़ा जाड़ा जाड़ा.
जाड़े ने कर दिया कबाड़ा.
बढ़िया!
प्रत्युत्तर देंहटाएंbahut sundar aur samyik balkavita.
प्रत्युत्तर देंहटाएं---------------------------------------------------------------------
प्रत्युत्तर देंहटाएंनए साल में बरसें ख़ुशियाँ : सरस पायस
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सुन्दर कविता..
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत सुन्दर कविता| धन्यवाद|
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