सीधी सादी गाय
सुन्दर प्यारी गाय
मेरे दरवाजे पर देखो
बंधी हुई है गाय।
रोज सुबह उठते ही
मुझसे चारा मांगे
हरी घास और भूंसा
खाती मेरी गाय।
दूध दही मक्खन तो
इतना मुझे खिलाती
पर कभी न मुझसे रूठे
मेरी प्यारी गाय।
सीधी सादी गाय
सुन्दर प्यारी गाय।
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हेमन्त कुमार







hemant ji
प्रत्युत्तर देंहटाएंbahut hi pyari kavita .sach !maja aa gaya padh kar
bahut bahut badhai
poonam
सीधी सादी प्यारी गाय .... बहुत सुंदर
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत प्यारी है गाय की कविता ....
प्रत्युत्तर देंहटाएंबढ़िया बालकविता के रूप में सुन्दर प्रस्तुति!
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत-बहुत शुभकामनाएँ!
होली का त्यौहार आपके सुखद जीवन और सुखी परिवार में और भी रंग विरंगी खुशयां बिखेरे यही कामना
प्रत्युत्तर देंहटाएंsweet n cute poetry !
प्रत्युत्तर देंहटाएंsahaj bhav se saji sunder saral kavita -
प्रत्युत्तर देंहटाएंbahut achhi lagi .