मंगलवार, 15 मार्च 2011

मेरी गाय

सीधी सादी गाय
सुन्दर प्यारी गाय
मेरे दरवाजे पर देखो
बंधी हुई है गाय।

रोज सुबह उठते ही
मुझसे चारा मांगे
हरी घास और भूंसा
खाती मेरी गाय।

दूध दही मक्खन तो
इतना मुझे खिलाती
पर कभी न मुझसे रूठे
मेरी प्यारी गाय।

सीधी सादी गाय
सुन्दर प्यारी गाय।
****
हेमन्त कुमार

7 टिप्‍पणियां:

  1. hemant ji
    bahut hi pyari kavita .sach !maja aa gaya padh kar
    bahut bahut badhai
    poonam

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  2. सीधी सादी प्यारी गाय .... बहुत सुंदर

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  3. बहुत प्यारी है गाय की कविता ....

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  4. बढ़िया बालकविता के रूप में सुन्दर प्रस्तुति!
    बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

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  5. होली का त्यौहार आपके सुखद जीवन और सुखी परिवार में और भी रंग विरंगी खुशयां बिखेरे यही कामना

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