बुधवार, 11 फ़रवरी 2009

ताक धिना धिन

ताक धिना धिन ताक धिना धिन
भालू करता ताकधिनाधिन
बन्दर फुनगी पर जा पहुँचा
नाच के बोला ताक धिना धिन।

कोयल जोर जोर से कूकी
तोता छोड़ के आया काम।
गधे की चीपों चीपों सुन के
घोड़ा दौड़ा हिन् हिन् हिन्।

गुफा से चीता बाहर आया
हाथी सूंड उठा चिल्लाया।
सोया जंगल जाग उठा जब
शेर भी नाचा ताक धिना धिन।

ताक धिना धिन ताक धिना धिन
भालू करता ताक धिना धिन।
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हेमंत कुमार

2 टिप्‍पणियां:

  1. हेमंत जी,
    वैसे तो पूरा बालगीत ही बहुत आकर्षक है
    लेकिन ये पंक्तियाँ बहुत अच्छी हैं .......
    गुफा से चीता बाहर आया
    हाथी सूंड उठा चिल्लाया।
    सोया जंगल जाग उठा जब
    शेर भी नाचा ताक धिना धिन।
    मैं जल्द ही आपके पास अपने कुछ बालगीत भेजूंगी .

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  2. हिन्दी में बच्चों के लिए कम लिखने का रोना रोया जाता है. आपके सार्थक प्रयास के लिए साधुवाद.

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