शनिवार, 28 फ़रवरी 2009

बैलगाड़ी


चर्र चूँ चर्र चूँ
चर्र चूँ चर्र चूँ
गीत सुनाए बैलगाड़ी।
ढेरों बोझा
और सवारी
पीठ पे लादे बैलगाड़ी।
चर्र चूँ…………….....।

कच्ची हों
या पक्की सड़कें
झूम के चलती बैलगाड़ी।
गावं शहर
कस्बे के रस्ते
नाप रही है बैलगाड़ी।
चर्र चूँ…………….....।

सूखे जब
पहियों का तेल
गा के मांगे बैलगाड़ी।
थक जाते जब
इसके बैल
रुक जाती है बैलगाड़ी।


चर्र चूँ चर्र चूँ
गीत सुनाए बैलगाड़ी।
००००००००००
हेमंत कुमार



9 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर बालगीत. बच्चों के लिए किये गए आपके प्रयास की सराहना करता हूँ.

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  2. सुंदर ध्वन्यात्मक रचना! नन्हे-मुन्नों को बहुत मज़ा आना चाहिए इसे पढ़कर!

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  3. बहुत सुंदर बाल गीत हेमेंत जी। :-)

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  4. आपकी रचनाएं पढ़कर मन चालीस साल पहले चला जाता है।

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  5. कल 10/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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