गुरुवार, 24 सितंबर 2009

बालगीत - केला


ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला

हरे भरे पेड़ों से भैया
बन्दर जी ने तोड़ा केला
पीला पीला मीठा केला
बन्दर जी ने खाया केला।
ला ला-----------------।

अम्मा बाबू भैया दीदी
सबको भाता है केला
क्योंकि चीनी से भी मीठा
होता है पीला केला।
ला ला-----------------।

पीले छिलके को छीलो तो
निकलेगा मीठा केला
बिन दांतों वाले बाबा भी
खाते हैं मीठा केला।

ला ला ला ला ला ला ला
ला ला ला ला ला ला ला
********
हेमन्त कुमार


6 टिप्‍पणियां:

  1. हेमन्त जी!
    बहुत बढ़िया मन-भादन बाल-गीत बै!
    बधाई!

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  2. बहुत ही सुंदर, प्यारा और मन भावन रचना लिखा है आपने ! मुझे तो केला बहुत पसंद है और मैं हर रोज़ खाती हूँ! आपको जब वक्त मिले मेरी सारी कवितायें पढियेगा और टिपण्णी दीजियेगा! विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनायें!

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  3. मेरे कम्प्यूटर में कोई तकनीकी फॉण्ट की खराबी आजाने से आपकी कविता को सेलेक्ट करके कापी की और गूगल के पर ले जाकर पढ़ा |बाल कविता अच्छी लगी \पहले भी बूढे शेर को आपने बन्दर से केला खिलवाया था तब घोड़ा घास और कुत्ता रोटी ले कर आया था | यह मेरी टिप्पणी आप पढ़ लेंगे लेकिन अपनी ही टिप्पणी मैं आपके ब्लॉग पर नहीं पढ़ सकता मुझे वहां अक्षर की जगह बिंदियाँ ही दिखाई देंगी | यह मिस्टर इंडिया टाईप क्या होगया मेरे कम्प्यूटर में मेरी तो समझ से बाहर है

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  4. बहुत सुन्दर!
    मैं भी छोटा बच्चा बन गया और आनन्द उठाया।

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