रविवार, 4 अक्तूबर 2009

अमरूद


गोले गोले
मीठे मीठे
पीले रंग के ये अमरूद।

पीले रंग पे
लाल बिन्दियों
वाले ये सुन्दर अमरूद ।

घर के पीछे
बाग में मेरे
खूब फ़ले देखो अमरूद।

तोता मैना
चिड़िया आकर
रोज सुबह खातीं अमरूद।

मेरा मिट्ठू
रोज सबेरे
मुझसे मांगे है अमरूद।

अम्मा बाबू
दादा दादी
सब खाते मीठे अमरूद।

गोले गोले
मीठे मीठे
पीले रंग के ये अमरूद।
*****
हेमन्त कुमार

8 टिप्‍पणियां:

  1. कविता तो आपकी कमाल की है जो अमरुद का बखान करते-करते दादा-दादी की भी याद दिला दी। काफी अच्छी कविताये लिखते हैं आप। बधाई हो आपकी इस कविता ले लिए।

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  2. अमरूद पर कम ही हैं कविताएँ!
    अमरूद पर एक सुंदर कविता के
    सर्जन के लिए आपको बधाई!

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  3. मुझे भी खाने हैं हरे-हरे औ पीले अमरुद....मीठे-मीठे से अमरुद

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  4. बहुत सुन्दर कविता है।
    अमरूद देखकर मन ललचा गया।

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  5. आपने इतना सुंदर कविता लिखा है और उसमें अमरुद जो मेरा सबसे पसंदीदार फल है जो खाने का मन कर रहा है पर इच्छा होने से भी खा नहीं सकती क्यूंकि ऑस्ट्रेलिया में अमरुद नहीं मिलता है!

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  6. बहुत सुन्दर कविता है। भई अरसा हो गया हमें अमरूद खाए। हमें भी खाने हैं ये मीठे-मीठे अमरूद। बधाई।

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  7. vaवह अमरूद? ये तो मुझे भी बहुत पसंद हैं बधाई इस कविता के लिये

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  8. बड़ी सहजता से सब कुछ कह गये आप ।
    आभार बेहतर रचनाधर्मिता के लिये ।

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