मंगलवार, 20 अक्तूबर 2009

मछली रानी


छम छम बहता देखो पानी
उसमें तैरे मछली रानी।

कभी भाग कर जाती नीचे
कभी झांकती है ये ऊपर
मुंह में अपने भरकर पानी
खेल दिखाती मछली रानी।

चाहे हो नदिया का पानी
या हो समन्दर गहरा पानी
सभी जगह पर रह लेती है
अपनी प्यारी मछली रानी।

नीली पीली या सतरंगी
जल जीवों की है यह संगी
बिन पानी के रह ना पाती
सुन्दर प्यारी मछली रानी।

छम छम बहता देखो पानी
उसमें तैरे मछली रानी
०००
हेमन्त कुमार



12 टिप्‍पणियां:

  1. प्रकृति से साक्षात्कार दिलचस्प है जिसका जरिया मछली के रूप में हाजिर है। जैसा कि आपने अपने बारे में लिखा है मेरे जीवन का उद्देश्य दुनिया के हर बच्चे के चेहरे पर मुस्कान देखना है, उस उद्देश्य को पूरा करने वाली सशक्त रचना है।

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  2. बिन पानी के रह ना पाती
    सुन्दर प्यारी मछली रानी।

    छम छम बहता देखो पानी
    उसमें तैरे मछली रानी

    सुन्दर बाल-गीत।
    बधाई!

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  3. बहुत ही सुंदर और मनमोहक रचना लिखा है आपने !
    मछली जल की रानी है,
    जीवन उसका पानी है,
    हाथ लगाओ तो डर जायेगी,
    बाहर निकालो तो मर जायेगी,
    पानी में डालो तो जी जायेगी !

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  4. छम छम बहता देखो पानी
    उसमें तैरे मछली रानी
    Bahut achhi lagi Kavita. Bachon ke liye aap bahut acha likhate hai. Main bhi kabhi-kabhi bachon ke liye likhati hun, aapki kavita padhkar achha laga.
    Badhai.

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  5. छम छम बहता देखो पानी
    उसमें तैरे मछली रानी

    पहली पंक्ति पढ़ते ही आपकी कविता को गुनगुनाने का मन हो आया।
    जैसा कि आपने मुझे अनुमति दी थी, मैं अवश्य आपकी कुछ कविताएँ अपनी हिन्दी की कक्षा में सिखाऊंगी। अभिभावक बच्चों के चित्र वेब पर डालने के लिए तैयार नहीं होते।

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  6. chan chan bahta dekho pani.....
    ish kavita ko padhne se man ko bhaut shanti mili.



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