शनिवार, 27 मार्च 2010

खुली खुली खिड़की सी दीदी





खुली खुली खिड़की तुम हमको
च्छी बहुत बहुत लगती हो
हमको तो तुम प्यारी प्यारी
बिलकुल दीदी सी लगती हो।

जैसे बिजली के जाने पर
दीदी हमको पंखा झलती
तुम भी खिड़की हवा भेजकर
वैसे ही तो पंखा झलती।
 
जब हम होते कुछ उदास तो
हमको नींद नहीं है आती
तो कहानियों के मेले में
दीदी हमको सैर कराती।

खिड़की तुम भी आसमान का
नीला टुकड़ा हमें दिखाती
जिस पर बिठा बिठा कर जाने
कहां कहां की सैर कराती।
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दिविक रमेश
श्री दिविक रमेश हिन्दी साहित्य  के प्रतिष्ठित कथाकार,कवि,एवम बाल साहित्यकार हैं।
आपकी अब तक कविता,आलोचनात्मक निबन्धों,बाल कहानियों,बालगीतों की 50 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।तथा आप कई राष्ट्रीय एवम अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किये जा चुके हैं।वर्तमान समय में आप दिल्ली युनिवर्सिटी से सम्बद्ध मोती लाल नेहरू कालेज में प्राचार्य पद पर कार्यरत हैं।
हेमन्त कुमार द्वारा प्रकाशित

9 टिप्‍पणियां:

  1. खुली खुली खिड़की तुम हमको
    अच्छी बहुत बहुत लगती हो
    हमको तो तुम प्यारी प्यारी
    बिलकुल दीदी सी लगती हो।
    didi jaise pyaare khyaal

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  2. बहुत आभार दिविक रमेश जी की उम्दा कविता पढ़वाने के लिए.

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  3. बाल कविता बहुत अच्छी लगी श्री दिविक रमेश जी के वारे में दी गई जानकारी के लिए आभार

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  4. khuli kuhli si khideki
    tum hamko deti ho jeevan jeene kaa eisa ehsaas
    jisne laga diye hai pankh diya hai aasman me udne kaa prayas
    aapki kavita ke leya chad shabd bhut sunder haio

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  5. चर्चा मंच पर आपका जिक्र रावेंद्रकुमार रवि ने किया है( २९ मार्च २०१०) , बस आपके ब्लॉग पर आया , अच्छा लगा , मुझसे दोस्ती करेंगे

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  6. बहुत बढ़िया लगा! रमेश जी की कविता पढ़वाने के लिए धन्यवाद!

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  7. अंकल आपकी कविता हमें बहुत,बहुत , बहुत अच्छी लगी । आप मेरी कहानियां भी पढने जरूर आना ...शुभम सचदेव

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